गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में लोगों की जान से खिलवाड़!हल्की आंधी में धराशायी हुए 11 केवी लाइन के खंभे, बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में लोगों की जान से खिलवाड़!हल्की आंधी में धराशायी हुए 11 केवी लाइन के खंभे, बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में बिजली विभाग की कथित लापरवाही ने एक बार फिर आम लोगों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। गौरेला के दत्तात्रेय क्षेत्र के पास 11 केवी विद्युत लाइन के दो खंभे हल्की आंधी और मामूली तूफान में ही जमीन पर गिर पड़े। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है और लोग बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।




स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विभाग द्वारा लगाए गए इन खंभों को पर्याप्त गहराई तक गाड़ा ही नहीं गया था। आरोप है कि करीब दो फीट मिट्टी में खंभा खड़ा कर औपचारिकता पूरी कर दी गई और विभाग अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो गया। यही कारण है कि हल्की हवा का दबाव भी खंभे सहन नहीं कर सके और देखते ही देखते जमीन पर गिर गए।


घटना के बाद मौके पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। लोगों का कहना है कि यदि यह हादसा दिन के व्यस्त समय में होता या आसपास बच्चे और राहगीर मौजूद होते तो बड़ा जानलेवा हादसा हो सकता था। क्षेत्रवासियों ने इसे सीधे तौर पर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ बताया है।

ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि बिजली विभाग में गुणवत्ता की जगह सिर्फ कागजी काम और खानापूर्ति पर ध्यान दिया जा रहा है। जिन खंभों को वर्षों तक तेज बारिश, तूफान और भारी मौसम का सामना करना होता है, उन्हें इतनी कमजोर नींव पर खड़ा करना विभागीय लापरवाही का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि जिस 11 केवी लाइन के खंभे गिरे हैं, वह क्षेत्र की मुख्य बिजली आपूर्ति लाइन से जुड़ी हुई है। खंभे गिरते ही आसपास के इलाके की बिजली व्यवस्था प्रभावित हो गई और लोगों को घंटों अंधेरे व परेशानी का सामना करना पड़ा। कई घरों और दुकानों में बिजली बंद रही, जिससे दैनिक कामकाज भी प्रभावित हुआ।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी अक्सर निरीक्षण और गुणवत्ता जांच के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सही गुणवत्ता के साथ कार्य किया गया होता तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती।
घटना के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर बिजली विभाग द्वारा खंभों की स्थापना के समय गुणवत्ता मानकों का पालन किया गया था या नहीं? क्या संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों ने सिर्फ बिल पास कराने के लिए काम पूरा दिखा दिया? यदि खंभे सही तकनीकी मानकों के अनुसार लगाए गए होते तो मामूली आंधी में उनके गिरने की नौबत क्यों आती?
क्षेत्रवासियों ने पूरे इलाके में लगाए गए अन्य बिजली खंभों की भी तकनीकी जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि बाकी खंभों की स्थिति भी इसी तरह कमजोर हुई तो भविष्य में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
जनता ने दोषी अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि सरकारी धन से किए जा रहे निर्माण कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। लोगों का आरोप है कि विभाग की अनदेखी और घटिया कार्यशैली का खामियाजा आम जनता भुगत रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? क्या बिजली विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? हल्की सी आंधी में धराशायी हुए इन खंभों ने विभागीय दावों और कार्यों की गुणवत्ता की पूरी पोल खोलकर रख दी है।















